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NCERT Solutions for Class 10th Hindi Chapter 15 : अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (Course B)

CBSE NCERT Solutions for Class 10th Hindi Chapter 15 – Ab kaha dusro ke dukh se dukhi hone wale by Nida Fajli – Sparsh II (Hindi Course B). पाठ 15- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले, लेखक -निदा फ़ाजली | स्पर्श भाग-2 हिंदी . Class X Hindi Course B Chapter 15 NCERT Solutions And Paragraph Wise Meanings (भावार्थ) – Ab kaha dusro ke dukh se dukhi hone wale by Nida Fajli – Sparsh II.


भावार्थ :

सारांश

इस पाठ में लेखक ने मानव द्वारों अपने स्वार्थ के लिए किये गए धरती पर किये गए अत्याचारों से अवगत कराया है। पाठ में बताया गया है की किस तरह मानव की न मिटने वाली भूख ने धरती के तमाम जीव-जन्तुओं के साथ खुद के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी है।

ईसा से 1025 वर्ष पहले एक बादशाह थे जिनका नाम बाइबिल के अनुसार सोलोमेन था, उन्हें कुरआन में सुलेमान कहा गया है। वह सिर्फ मानव जाति के ही राजा नहीं थे बल्कि सभी छोटे-बड़े पशु-पक्षी के भी राजा थे। वह इन सबकी भाषा जानते थे। एक बार वे अपने लश्कर के साथ रास्ते से गुजर रहे थे। उस रास्ते में कुछ चीटियाँ घोड़ों की टापों की आवाज़ें सुनकर अपने बिलों की तरफ वापस चल पड़ीं। इसपर सुलेमान ने उनसे घबराने को न कहते हुए कहा कि खुदा ने उन्हें सबका रखवाला बनाया है। वे मुसीबत नहीं हैं बल्कि सबके लिए मुहब्बत हैं। चीटियों ने उनके लिए दुआ की और वे आगे बढ़ चलें।

ऐसी एक घटना का जिक्र करते हुए सिंधी भाषा के महाकवि शेख अयाज़ ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि एक दिन उनके पिता कुएँ से नहाकर घर लौटे तो माँ ने भोजन परोसा। जब उन्होंने रोटी का एक कौर तोड़ा तभी उन्हें अपनी बाजू पर एक काला च्योंटा रेंगता दिखाई दिया। वे भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए और पहले उस बेघर हुए च्योंटे को वापस उसके घर कुएँ पर छोड़ आये।

बाइबिल और अन्य ग्रंथों में नूह नामक एक पैगम्बर का जिक्र मिलता है जिनका असली नाम लशकर था परन्तु अरब में इन्हें नूह नाम से याद किया जाता है क्योंकि ये पूरी जिंदगी रोते रहे। एक बार इनके सामने से एक घायल कुत्ता गुजरा चूँकि इस्लाम में कुत्ते को गन्दा माना जाता है इसलिए इन्होनें उसे गंदे कुत्ते दूर हो जा कहा। कुत्ते ने इस दुत्कार को सुनकर जवाब दिया कि  ना मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ और ना तुम अपनी पसंद से इंसान हो। बनाने वाला सब एक ही है। इन बातों को सुनकर वे दुखी हो गए और सारी उम्र रोते रहे। महाभारत में भी एक कुत्ते ने युधिष्ठिर का साथ अंत तक दिया था।

भले ही इस संसार की रचना की अलग-अलग कहानियाँ हों परन्तु इतना तय है की धरती किसी एक की नहीं है। सभी जीव-जंतुओं, पशु, नदी पहाड़ सबका इसपर सामान अधिकार है। मानव इस बात को नहीं समझता। पहले उसने संसार जैसे परिवार को तोड़ा फिर खुद टुकड़ों में बँटकर एक-दूसरे से दूर हो चुका है। पहले लोग मिलजुलकर बड़े-बड़े दालानों-आंगनों में रहते थे पर अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में सिमटने लगे हैं। बढ़ती हुई आबादी के कारण समंदर को पीछे सरकाना पड़ रहा है, पेड़ों को रास्ते से हटाना पड़ रहा है जिस कारण फैले प्रदूषण ने पक्षियों को भागना शुरू कर दिया है। नेचर की भी सहनशक्ति होती है। इसके गुस्से का नमूना हम कई बार अत्यधिक गर्मी, जलजले, सैलाब आदि के रूप में देख रहे हैं।

लेखक की माँ कहती थीं की शाम ढलने पर पेड़ से पत्ते मत तोड़ो, वे रोयेंगे। दीया-बत्ती के वक़्त फूल मत तोड़ो। दरिया पर जाओ तो सलाम करो कबूतरों को मत सताया करो और मुर्गे को परेशान मत करो वह अज़ान देता है। लेखक बताते हैं उनका ग्वालियर में मकान था। उस मकान के दालान के रोशनदान में कबूतर के एक जोड़े ने अपना घोंसला बना लिया। एक बिल्ली ने उचककर दो में से एक अंडा फोड़ दिया। लेखक की माँ से दूसरा अंडा बचाने के क्रम में फूट गया। इसकी माफ़ी के लिए उन्होंने दिन भर कुछ नहीं खाया और नमाज़ अदा करती रहीं।

अब लेखक मुंबई के वर्सोवा में रहते हैं। पहले यहाँ पेड़, परिंदे और दूसरे जानवर रहते थे परन्तु अब यह शहर बन चुका है। दूसरे पशु-पक्षी इसे छोड़े कर जा चुके हैं, जो नहीं गए वे इधर-उधर डेरा डाले रहते हैं। लेखक के फ्लैट में भी दो कबूतरों ने एक मचान पर अपना घोंसला बनाया, बच्चे अभी छोटे थे। खिलाने-पिलाने की जिम्मेदारी बड़े कबूतरों पर थीं। वे दिन-भर आते जाते रहते थे। लेखक और उनकी पत्नी को इससे परेशानी होती इसलिए उन्होंने जाली लगाकर उन्हें बाहर कर दिया। अब दोनों कबूतर खिड़की के बाहर बैठे उदास रहते हैं परन्तु अब ना सुलेमान हैं न लेखक की माँ जिन्हें इनकी फ़िक्र हो।

लेखक परिचय

निदा फ़ाज़ली

इनका जन्म 12 अक्टूबर 1938 को दिल्ली में हुआ और बचपन ग्वालियर में बिता। ये साठोत्तर पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। आम बोलचाल की भाषा में और सरलता से किसी के भी दिलोदिमाग में घर कर सकें ऐसी कविता करने में इन्हें महारत हासिल है। गद्य रचनाओं में शेर-ओ-शायरी परोसकर बहुत कुछ को थोड़े में कह देने वाले अपने किस्म के अकेले गद्यकार हैं। इन दिनों फिल्म उद्योग से सम्बन्ध हैं।

प्रमुख कार्य

पुस्तक – लफ्जों का पुल, खोया हुआ सा कुछ, तमाशा मेरे आगे
आत्मकथा – दीवारों के बीच, दीवारों के पार
पुरस्कार – खोया हुआ सा कुछ के लिये 1999 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार।

कठिन शब्दों के अर्थ

• हाकिम – राजा या मालिक
• लश्कर (लशकर) – सेना या विशाल जनसमुदाय
• लक़ब – पदसूचक नाम
• प्रतीकात्मक – प्रतीकस्वरुप
• दालान – बरामदा
• सिमटना – सिकुड़ना
• जलजले – भूकम्प
• सैलाब – बाढ़
• सैलानी – ऐसे पर्यटक जो भ्रमण कर नए-नए विषयों के बारे में जानना चाहते हैं
• अज़ीज़ – प्रिय
• मज़ार – दरगाह
• गुंबद – मस्जिद, मंदिर और गुरुद्वारे के ऊपर बनी गोल छत जिसमें आवाज़ गूँजती है
• अज़ान – नमाज़ के समय की सूचना जो मस्जिद की छत या दूसरी ऊँचे जगह पर खड़े होकर दी जाती है
• डेरा – अस्थायी पड़ाव


प्रश्नोत्तरी :

पृष्ठ संख्या: 114
प्रश्न अभ्यास
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों दीजिए –

1. बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?

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उत्तर

आबादी बढ़ने के कारण स्थान का अभाव हो रहा था इसलिए बिल्डर नई-नई इमरातें बनाने के लिए बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे।

2.  लेखक का घर किस शहर में था?

उत्तर

लेखक का घर ग्वालियर शहर में था।

3. जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?

उत्तर

एकल परिवारों का चलन होने के कारण जीवन डिब्बों जैसे फलैटों में सिमटने लगा है।

4. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?

उत्तर

कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक बिल्ली ने तोड़ दिया था दूसरा बिल्ली से बचाने के चक्कर में माँ से टूट गया। कबूतर इससे परेशान होकर इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।
लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

1. अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

उत्तर

अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद करते हैं क्योंकि वे हमेशा दूसरों के दुःख में दुखी रहते थे। नूह को पैगम्बर या ईश्वर का दूत भी कहा गया है। उनके मन में करूणा होती थी।

2. लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

उत्तर

लेखक की माँ दिन छिपने या सूरज ढलने के बाद पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं क्योंकि उस समय वे रोते हैं, रात में फूल तोड़ने पर वे श्राप देते हैं।

3. प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर

प्रकृति में आए असंतुलन का परिणाम भूकंप, अधिक गर्मी, वक्त बेवक्त की बारिश, अतिवृष्टि, साइकलोन आदि और अनेक बिमारियाँ हैं।

4. लेखक की माँ ने पूरे दिन रोज़ा क्यों रखा?

उत्तर

लेखक के घर एक कबूतर का घोंसला था जिसमें दो अंडे थे। एक अंडा बिल्ली ने झपट कर तोड़ दिया, दूसरा अंडा बचाने के लिए माँ उतारने लगीं तो टूट गया। इस पर उन्हें दुख हुआ। माँ ने प्रायश्चित के लिए पूरे दिन रोज़ा रखा और नमाज़ पढ़कर माफी माँगती रहीं।

5. लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक पहले ग्वालियर में रहता था। फिर बम्बई के वर्साेवा में रहने लगा। पहले घर बड़े-बड़े होते थे, दालान आंगन होते थे अब डिब्बे जैसे घर होते हैं, पहले सब मिलकर रहते थे अब सब अलग-अलग रहते हैं, इमारतें ही इमारतें हैं पशु-पक्षियों के रहने के लिए स्थान नहीं रहे,पहले अगर वे घोंसले बना लेते थे तो ध्यान रखा जाता था पर अब उनके आने के रास्ते बंद कर दिए जाते हैं।

6. डेरा डालने से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

डेरा डालने का अर्थ है कुछ समय के लिए रहना। बड़ी-बड़ी इमारतें बनने के कारण पक्षियों को घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल रही है। वे इमारतों में ही डेरा डालने लगे हैं।

7. शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?

उत्तर

शेख अयाज़ के पिता जब कुँए से नहाकर लौटे तो काला च्योंटा चढ़ कर आ गया। भोजन करते वक्त उन्होंने उसे देखा और भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए। वे पहले उसे घर छोड़ना चाहते थे।

पृष्ठ संख्या: 115

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −

1. बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर

बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहाँ तक कि समुद्रस्थलों को भी छोटा किया जा रहा है। पशुपक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब कारणों से प्राकृतिक का सतुंलन बिगड़ गया है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कभी गर्मी, कभी तेज़ वर्षा इन के कारण कई बिमारियाँ हो रही हैं। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

2. लेखक की पत्नी को खिड़की मे जाली क्यों लगवानी पड़ी?

उत्तर

लेखक के घर में कबतूर ने घोंसला बना लिया था जिसमें दो बच्चे थे उनको दाना खिलाने के लिए कबूतर आया जाया करते थे, सामान तोड़ाकरते थे। इससे परेशान होकर लेखक की पत्नी ने मचान के आगे घोंसला सरका दिया और वहाँ जाली लगवानी पड़ी।

3. समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

उत्तर

कई सालों से बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे और उसकी ज़मीन हथिया रहे थे। समुद्र सिमटता जा रहा था। उसने पहले टाँगें समेटी फिर उकडू बैठा फिर खड़ा हो गया। फिर भी जगह कम पड़ने लगी जिससे वह गुस्सा हो गया। उसने गुस्सा निकालने के लिए तीन जहाज फेंक दिए। एक वार्लीके समुद्र के किनारे, दूसरा बांद्रा मे कार्टर रोड के सामने और तीसरा गेट वे ऑफ इंडिया पर टूट फूट गया।

4. मट्टी से मट्टी मिले,
खो के सभी निशान,
किसमें कितना कौन है,
कैसे हो पहचान
इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इन पंक्तियों में बताया गया है कि सभी प्राणी एक ही मिट्टी से बने हैं और अंत में हमारा शरीर व्यक्तिगत पहचान खोकर उसी मिट्टी में मिल जाता है। यह पता नही रहता कि उस मिट्टी में कौन-कौन से मिट्टी मिली हुई है यानी मनुष्य में कितनी मनुष्यता है और कितनी पशुता यह किसी को पता नहीं होता।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −

1. नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।

उत्तर

प्रकृति के साथ मनुष्य खिलवाड़ करता रहा है परन्तु प्रकृति की भी एक हद तक सहने की शक्ति होती है। इसके गुस्से का नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था। इसने तीन जहाजों को गेंद की तरह उछाल दिया था।

2. जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।

उत्तर

महान तथा बड़े लोगों में क्षमा करने की प्रधानता होती है। किसी भी व्यक्ति की महानता क्रोध कर दण्ड देने में नहीं होती है बल्कि किसी की भी गलती को क्षमा करना ही महान लोगों की विशेषता होती है। समुद्र महान है। वह मनुष्य के खिलवाड़ को सहन करता रहा। पर हर चीज़ की हद होती है। एक समय उसका क्रोध भी विकराल रूप में प्रदर्शित हुआ। वैसे तो महान व्यक्तियों की तरह उसमें अथाह गहराई,शांति व सहनशक्ति है।

3. इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।

उत्तर

बस्तियों के फैलाव से पेड़ कटते गए और पक्षियों के घर छिन गए। कुछ की तो जातियाँ ही नष्ट हो गईं। कुछ पक्षियों ने यहाँ इमारतों में डेरा जमा लिया।

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4. शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में उनकी यह भावना छिपी हुई थी कि वे पशु-पक्षियों की भावनाओं को समझते थे। वे चीटें को भी घर पहुँचाने जा रहे थे। उनके लिए मनुष्य पशु-पक्षी एक समान थे। वे किसी को भी तकलीफ नहीं देना चाहते थे।

भाषा अध्यन

1. उदारण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए; जैसे −

(क) माँ ने भोजन परोसा। कर्ता
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ। ………………….
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया। ………………….
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। ………………….
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो। ………………….

उत्तर

(क) माँ ने भोजन परोसा। कर्ता
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ। संप्रदान
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया। कर्म
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। अधिकरण
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो। अधिकरण

2. नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए −

चींटी, घोड़ा, आवाज़, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।

उत्तर

चींटी चीटियाँ
घोड़ा घोड़ें
आवाज़ आवाज़ें
बिल बिल
फ़ौज फ़ौजें
रोटी रोटियाँ
बिंदु बिंदु (बिदुओ को)
दीवार दीवारें
टुकड़ा टुकड़े

3. निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे किजिए −

(क) आजकल ……………… बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना)
(ख) पूरे कमरे को ……………… दो। (सजा/सज़ा)
(ग) माँ दही …………… भूल गई। (जमाना/ज़माना)
(घ) …………. चीनी तो देना (जरा/ज़रा)
(ङ) दोषी को ………… दी गई। (सजा/सज़ा)
(च) महात्मा के चेहरे पर……………. था। (तेज/तेज़)

उत्तर

(क) आजकल ....ज़माना..…. बहुत खराब है।
(ख) पूरे कमरे को .सजा..…. दो।
(ग) माँ दही ….जमाना... भूल गई।
(घ) ...ज़रा.… चीनी तो देना
(ङ) दोषी को ..सज़ा.... दी गई।
(च) महात्मा के चेहरे पर ..तेज.. था।


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

1. बाइबिल के सोलोमेन जिन्हें कुरान में सुलेमान कहा गया है, ईसा से 1025 वर्ष पूर्व एक बादशाह थे। कहा गया है, वह केवल मानव जाति के ही राजा नहीं थे, सारे छोटे-बड़े पशु-पक्षी के भी हाकिम थे। वह इन सबकी भाषा जानते थे। एक दफा सुलेमान अपने लश्कर के साथ एक रास्ते से गुजर रहे थे। रास्ते में कुछ चींटियों ने घोड़ों की तापों की आवाज़ सुनी तो डर कर एक-दूसरे से कहा, ‘आप जल्दी से अपने-अपने बिलों में चलो, फ़ौज आ रही है।’ सुलेमान उनकी बातें सुनकर थोड़ी दूर परं रुक गए और चींटियों से बोले, ‘घबराओ नहीं, सुलेमान को खुद ने सबका रखवाला बनाया है। मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, सबके लिए मुहब्बत हूँ।’ चींटियों ने उनके लिए ईश्वर से दुआ की और सुलेमान अपनी मंज़िल की ओर बढ़ गए।

(क) सुलेमान कौन थे और उनके व्यक्तित्व की क्या विशेषता थी?  (2)
(ख) चींटियाँ क्यों भयभीत थीं?                                                     (1)
(ग) सुलेमान ने चींटियों क्या कहा?                                               (2)

उत्तर

(क) सुलेमान ईसा से 1025 वर्ष पूर्व एक बादशाह थे। वे मानव जाति के राजा होने के साथ पशु-पक्षियों के भी हाकिम थे। वे इनकी भाषा समझते थे तथा सबका भला चाहते थे।
(ख) चींटियाँ सुलेमान की फौज के घोड़ों की टापों की आवाज़ सुनकर भयभीत थीं।
(ग) सुलेमान ने चींटियों से कहा कि वे सबके रखवाले हैं। किसी के लिए मुसीबत ना होकर सबके लिए मुहब्बत हैं।

2. दुनिया कैसे वजूद में आई? पहले क्या थी? किस बिंदु से इसकी यात्रा शुरू हुई? इन प्रश्नों के उत्तर विज्ञान अपनी तरह से देता है, धर्मिक ग्रंथ अपनी-अपनी तरह से। संसार की रचना भले ही कैसे हुई हो लेकिन धरती किसी एक की नहीं है। पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है। यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं। पहले पूरा संसार एक परिवार के समान था अब टुकड़ों में बँटकर एक-दूसरे से दूर हो चुका है। पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिल-जुलकर रहते थे अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है। बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है। बारूदों की विनाशलीलाओं ने वातावरण को सताना शुरू कर दिया। अब गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक्त की बरसातें, ज़लज़ले,सैलाब, तूफ़ान और नित नए रोग, मानव और प्रकृति के इसी असंतुलन के परिणाम हैं। नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है।

(क) दुनिया के विषय में कौन-कौन से सवाल उठते हैं?                                  (1)
(ख) पहले और अब के घरों में क्या बदलाव आया है?                                     (1)
(ग) मनुष्य ने दुनिया में क्या परिवर्तन लाया और इसके क्या परिणाम हुए?   (2)

उत्तर

(क) दुनिया कैसे वजूद में आई? पहले क्या थी? किस बिंदु से इसकी यात्रा शुरू हुई? यह सवाल दुनिया के विषय में उठते हैं।
(ख) पहले लोग बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में मिलजुलकर रहते थे परन्तु अब लोग छोटे-छोटे डिब्बों जैसे घरों में जीवन बिताने लगे हैं।
(ग) मनुष्य ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया, पेड़ों को रास्तों से हटाया तथा बारूदों की विनाशलीलायें से वातावरण को सताना शुरू कर दिया जिस कारण प्रकृति में असंतुलन आ गया। परिणामस्वरूप गरमी में ज़्यादा गरमी, बेवक्त की बरसातें, ज़लज़ले, सैलाब, तूफ़ान और नित्य नए रोग उत्पन्न हुए।

3. कई सालों से बड़े-बडे़ बिल्डर समंदर को पीछे धकेल कर उसकी ज़मीन को हथिया रहे थे। बेचारा समंदर लगातार सिमटता जा रहा था। पहले उसने अपनी पैफली हुई टाँगें समेटीं, थोड़ा सिमटकर बैठ गया। फिर जगह कम पड़ी तो उकड़ु बैठ गया। फिर खड़ा हो गया…जब खड़े रहने की जगह कम पड़ी तो उसे गुस्सा आ गया। जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है। परंतु आता है तो रोकना मुश्किल हो जाता है, और यही हुआ, उसने एक रात अपनी लहरों पर दौड़ते हुए तीन जहाज़ों को उठाकर बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में पेंफक दिया। एक वर्ली के समंदर के किनारे पर आकर गिरा, दूसरा बांद्रा में कार्टर रोड के सामने औंधे मुँह और तीसरा गेट-वे-ऑफ़ इंडिया पर टूट-फूटकर सैलानियों का नज़ारा बना बावजूद कोशिश, वे फिर से चलने-फिरने के काबिल नहीं हो सके।

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(क) बिल्डर समुद्र के साथ क्या और क्यों कर रहे थे?   (2)
(ख) समुद्र को गुस्सा क्यों आया?                               (2)
(ग) समुद्र ने अपना क्रोध किस प्रकार प्रकट किया?     (1)

उत्तर 

(क) बिल्डर समुद्र को धकेल कर उसकी जमीन हथिया रहे थे। वे ऐसा धन के लालच में कर रहे थे।
(ख) दिन-प्रतिदिन बिल्डरों द्वारा जमीन हथियाए जाने से समुद्र सिकुड़ता जा रहा था। समुद्र के सामने उसके अपने अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो गया इसलिए उसे गुस्सा आ गया।
(ग) समुद्र ने अपना क्रोध प्रकट करने के लिए अपनी लहरों पर तीन जहाज़ों को बच्चों की गेंद की तरह तीन दिशाओं में फेंक दिया।

4. ग्वालियर में हमारा एक मकान था, उस मकान के दालान में दो रोशनदान थे। उसमें कबूतर के एक जोड़े ने घोंसला बना लिया था। एक बार बिल्ली ने उचककर दो में से एक अंडा तोड़ दिया। मेरी माँ ने देखा तो उसे दुख हुआ। उसने स्टूल पर चढ़कर दूसरे अंडे को बचाने की कोशिश की। लेकिन इस कोशिश में दूसरा अंडा उसी के हाथ से गिरकर टूट गया। कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे। उनकी आँखों में दुख देखकर मेरी माँ की आँखों में आँसू आ गए। इस गुनाह को खुदा से मुआफ़ कराने के लिए उसने पूरे दिन रो ज़ा रखा। दिन-भर कुछ खाया-पिया नहीं। सिर्फरोती रही और बार-बार नमाज पढ़-पढ़कर खुदा से इस गलती को मुआफ़ करने की दुआ माँगती रही।

(क) ग्वालियर के मकान में घटी किस घटना से लेखक की माँ को दुःख पहुँचा?   (2)
(ख) दूसरे अंडे को बचाने के प्रयास में क्या हुआ?                                               (1)
(ग) लेखक की माँ ने अपनी गलती का किस प्रकार प्रायश्चित किया?                 (1)

उत्तर

(क) ग्वालियर के मकान के दालान में रोशनदान में कबूतर के एक जोड़े ने घोंसला बनाया था। एक बार बिल्ली ने उचककर उनके एक अंडे को फोड़ दिया जिसे देखकर लेखक की माँ को दुःख पहुँचा।
(ख) दूसरे अंडे को बचाने के प्रयास में लेखक की माँ की हाथ से अंडा गिरकर टूट गया।
(ग) लेखक की माँ ने दिन भर रोज़ा रखा और दिनभर कुछ खाया-पिया नहीं। बार-बार नमाज़ पढ़ती रहीं और गलती की माफ़ी माँगती रहीं। इस तरह लेखक की माँ ने प्रायश्चित किया।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिये-

1. सुलेमान कौन थे? उन्हें सबका राजा क्यों कहते हैं?

उत्तर

सुलेमान ईसा से 1025 वर्ष पूर्व एक बादशाह थे। वे सिर्फ मनुष्य जाति की ही भलाई नहीं करते थे बल्कि पशु-पक्षियों की भी भाषा जानते थे और उनका भी ध्यान रखते थे इसलिए उन्हें सबका राजा कहते हैं।

2. शेख अयाज़ ने अपनी आत्म-कथा में किस घटना का जिक्र किया है?

उत्तर
शेख अयाज़ ने अपनी आत्म-कथा में अपने पिता की एक घटना का जिक्र किया है। एक दिन उनके पिता कुएँ से नहाकर लौटे। भोजन करते समय उन्होंने देखा कि एक काला च्योंटा उनकी बाजू पर रेंग रहा है। उन्हें लगा की च्योंटा कुएँ से उनके पास आकर बेघर हो गया है इसलिए उन्होंने थोड़ी भी देर ना करते हुए उसे वापस उसके घर पहुँचाने के लिए भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए।
3. लशकर सारी उम्र रोते क्यों रहे?

उत्तर

एक बार लशकर के सामने एक घायल कुत्ता गुज़रा। लशकर ने उसे दुत्कारते हुए नज़रों के सामने से दूर हो जाने को कहा चूँकि इस्लाम में कुत्ते को गन्दा समझा जाता है। इसपर उसे कुत्ते ने कहा की ना तो मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ और ना ही तुम अपनी मर्ज़ी से मनुष्य, हमें बनाने वाला एक ही है।

4. लेखक की माँ ने प्रायश्चित क्यों और कैसे किया?

उत्तर

लेखक की माँ की हाथों से गलती से कबतूर का अंडा फूट गया इसलिए उन्होंने दिन भर रोज़ा रखकर नमाज़ पढ़ती रहीं और गलती की माफ़ी माँगती रहीं। इस तरह लेखक की माँ ने प्रायश्चित किया।

5. ‘अब कहाँ दूसरों के दुःख से दुःखी होने वाले’ पाठ से हमें क्या सन्देश मिलता है?

उत्तर

इस पाठ से हमें प्रकृति से प्रेम करने का सन्देश मिलता है। हमें अपने आप को सर्वश्रेष्ठ और अन्य प्राणियों को तुच्छ नहीं समझना चाहिए। अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति का नुकसान नहीं करना चाहिए। सबसे मिलजुलकर रहना तथा सबके सुख-दुःख का ख्याल रखना चाहिए।

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